बहरैन के मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि इस देश की तानाशाही सरकार का अंत मिस्र के पूर्व तानाशाह हुस्नी मुबारक जैसा होगा। बहरैन के मानवाधिकार आयोग के एक प्रमुख सदस्य अब्बास अलइमरान ने अलआलम टीवी चैनल से साक्षात्कार में कहा कि इस देश के युवा बहरैन की तानाशाही सरकार के अंत तक अपने शांतिपूर्ण जनांदोलन को जारी रखेंगे और आले ख़लीफ़ा सरकार को भी उसी अंत का सामना होगा जो मिस्र में हुस्नी मुबारक, टयूनिशिया में बिन अली और लीबिया में क़ज़्ज़ाफ़ी का हुआ है। उन्होंने कहा कि लोग १४ फरवरी को सीमित राजनीतिक और सामाजिक सुधार की मांग कर रहे थे परंतु इस देश की तानाशाही सरकार ने उनकी अनदेखी की और जनता की वैध मांगों का उत्तर देने के बजाये सैनिक मार्गों से उसका दमन किया यहां तक कि इस कार्य के लिए उसने विदेशी सैनिकों का भी प्रयोग किया। अब्बास अलइमरान के अनुसार इस देश की तानाशाही सरकार दसियों व्यक्तियों की हत्या और सैकड़ों लोगों को घायल कर चुकी है तथा कई मस्जिदों को शहीद कर चुकी है और उसके इन कृत्यों से बहरैन के लोगों के लिए उसका वास्तविक चेहरा स्पष्ट हो चुका है तथा अब राजनीतिक ढंग से इस संकट के समाधान के लिए समय नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि इस संकट के समाधान का मात्र मार्ग, इस देश की तानाशाही सरकार का सत्ता से अलग हो जाना है। अब्बास अलइमरान ने स्पष्ट किया कि विश्व के दूसरे तानाशाहों की भांति आले ख़लीफ़ा पर भी मानवता विरोधी अपराधों के कारण क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अदालतों में मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिये। उन्होंने बल देकर कहा कि बहरैन के लोग किसी भी स्थिति में अपनी वैध मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और उन्होंने बड़ी अच्छी तरह आले ख़लीफ़ा की तानाशाही सरकार की दमनकारी नीतियों का मुक़ाबला किया और अब सफ़लता अधिक दूर नहीं है। समाचार समाप्त........166
8 सितंबर 2011 - 19:30
समाचार कोड: 264428
बहरैन के मानवाधिकार आयोग के एक प्रमुख सदस्य अब्बास अलइमरान ने अलआलम टीवी चैनल से साक्षात्कार में कहा कि इस देश के युवा बहरैन की तानाशाही सरकार के अंत तक अपने शांतिपूर्ण जनांदोलन को जारी रखेंगे